इस्लामाबाद, 20 अगस्त । पाकिस्तान सरकार अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान को राजधानी इस्लामाबाद के शिफा अंतरराष्ट्रीय अस्पताल भेजने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से बौखला गई है। उसने फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बुधवार को उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर आदेश वापस लेने की मांग की है। इमरान खान अभी रावलपिंडी की आदियाला जेल में बंद हैं। अब देखना यह है कि शीर्ष अदालत का इस याचिका पर क्या रुख होता है।
द न्यूज अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, संघीय सरकार के मुख्य आयुक्त की ओर से इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल नवीद हयात मलिक ने दायर सरकार की पुनर्विचार याचिका में अंतरिम आदेश को भेदभावपूर्ण बताया गया है। पुनर्विचार याचिका में संघीय सरकार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का 18 अगस्त का अंतरिम आदेश उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और उस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। इस याचिका में कहा गया, ऐसा लगता है कि माननीय कोर्ट का ध्यान ऊपर बताए गए कानूनी प्रावधान पर नहीं गया, जिससे एक ऐसी गलती हुई जो रिकॉर्ड पर साफ दिख रही है। अगर कोर्ट ने कानून के उक्त प्रावधान पर ध्यान दिया होता, तो समीक्षा के अधीन आदेश पारित नहीं किया जा सकता था। इसलिए, इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
संघीय सरकार की पुनर्विचार याचिका के अनुसार, 5 अगस्त, 2023 को एक एडिशनल सेशन जज ने इमरान खान को तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में उन्होंने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में सजा के खिलाफ अपील दायर की। याचिका में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में शिफ्ट किए जाने का अनुरोध किया था, लेकिन उच्च न्यायालय ने 12 मार्च को यह अनुरोध खारिज कर दिया। इसके बाद उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की गई।
पुनर्विचार याचिका में संघीय सरकार ने तर्क दिया कि कुछ मामलों में कैदी को अस्पताल भेजने के लिए सरकार की मंज़ूरी और जेल महानिरीक्षक के जरिए कार्रवाई की जरूरत होती है। अस्पताल भेजे गए कैदियों को पुलिस की निगरानी में रहना चाहिए। याचिका में पाकिस्तान जेल नियम, 1978 (197) का जिक्र किया है। यह कैदी को जेल से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया तय करता है। सरकार ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 10ए निष्पक्ष सुनवाई और कानून की उचित प्रक्रिया का अधिकार देता है। याचिका के अनुसार, यह मामला पहली बार उच्चतम न्यायालय के सामने आया और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी नहीं किए गए।
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार (18 अगस्त) को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख इमरान खान को 2 दिन में शिफा अस्पताल में भर्ती कराने और 16 सितंबर तक इलाज कराने का निर्देश दिया था। साथ ही, खान की जांच और उपचार के लिए एक चिकित्सा बोर्ड गठित करने को कहा था
उच्चतम न्यायालय ने इमरान के निजी चिकित्सक और बहन को उनकी चिकित्सा देखभाल से जुड़े रहने की अनुमति भी दी है। यह आदेश इमरान खान (73) के स्वास्थ्य को लेकर उनके परिवार और समर्थकों की कई महीनों से जताई जा रही चिंता तथा उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं दिए जाने के आरोपों के बीच आया। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि खान को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक वहीं रखा जाए। संसदीय कार्यमंत्री तारिक फजल चौधरी ने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश को अक्षरश: लागू करेगी।
उच्चतम न्यायालय ने अस्पताल में रहने के दौरान खान को सप्ताह में एक बार अपने परिवार से मुलाकात की भी अनुमति दी। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की आदियाला जेल में हैं। समर्थक उनकी गिरफ्तारी के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। परिजनों और पार्टी के सहयोगियों ने बार-बार मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने अधिकारियों पर खान को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, परिवार से मुलाकात और कानूनी सलाहकारों तक पहुंच से वंचित करने का भी आरोप लगाया है। मंगलवार को जारी आदेश में कहा गया कि शिफा में जांच और इलाज के दौरान डॉ. उजमा और पूर्व प्रधानमंत्री के निजी डॉक्टर मौजूद रहें और इसका खर्च उनका परिवार उठाए।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वह पूर्व प्रधानमंत्री को कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा अस्पताल ले जाएं और कुछ दिनों के भीतर जरूरी इंतजाम पूरे करें। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने चेतावनी दी कि उसके निर्देशों का कोई भी उल्लंघन पीटीआई संस्थापक को दी जा रही सुविधाओं को वापस लेने का कारण बन सकता है। इस फैसले का पीटीआई ने स्वागत किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से शिफा अस्पताल के बाहर इकट्ठा न होने की अपील की।




