मुंबई, 21 अगस्त ( हि.स.) । राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुधाकरराव नाइक की जयंती के मौके पर और 'पानी बचाने का दिन' और 'पानी बचाने का हफ्ता' अभियान के तहत, आज ठाणे शहर में बहुत जोश भरे माहौल में एक बड़ी जागरूकता रैली 'महा वॉकथॉन -( महा पैदल मार्च) पानी बचाने हेतू (वॉक फॉर वॉटर') निकाली गई।
'मिट्टी बचाओ, पानी बचाओ - सुरक्षित भविष्य बनाओ' और 'पानी बचाओ, पानी बचाओ' के मुख्य ध्येय पर आधारित इस महा वॉकथॉन का उद्घाटन उपवन झील से हुआ। उसके बाद, रैली आदिवासी आश्रम क्रांतिवीर राघोजी भांगरे चौक, आदिवासी वीरांगना झलकारी बाई मार्ग, वसंत विहार फाटा होते हुए डॉ. काशीनाथ घनेकर थिएटर पहुंची। इस मौके पर ठाणे के सैकड़ों नागरिकों, विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, युवाओं और सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वार्म-अप सत्र से हुई। उपस्थित सभी लोगों ने इस ज़ुम्बा अभ्यास का पूरा आनंद लिया। इस अवसर पर मार्गदर्शन देते हुए, ठाणे के जिला कलेक्टर डॉ। श्री कृष्ण पांचाल ने कहा कि इस अभियान को ठाणे में अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली है और इसके लिए 6 से 7 हजार से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। नागरिकों को जल संरक्षण का संदेश देने के लिए पूरे मार्ग पर जल जागरूकता सूचना बोर्ड (फ्लेक्स) लगाए गए थे। चूंकि इस अभियान के तहत आयोजित रील प्रतियोगिता को युवाओं से भारी प्रतिक्रिया मिल रही है, इसलिए भागीदारी की अवधि बढ़ा दी गई है और उन्होंने नागरिकों और छात्रों से बड़ी संख्या में रील तैयार करने और इस जागरूकता आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। विजय देवराज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सरकार का मुख्य मकसद 15 अगस्त से 21 अगस्त तक चलने वाले वॉटर कंज़र्वेशन वीक को लोगों की भागीदारी से एक बड़ा जन आंदोलन बनाना है, न कि सिर्फ़ एक डिपार्टमेंट तक सीमित रखना। उन्होंने बताया कि लोगों के ज़बरदस्त जोश को देखते हुए रील कॉम्पिटिशन की डेडलाइन 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है।इस मेगा वॉकथॉन में हिस्सा लेने वाले लोकल लोगों और शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। ठाणे के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक में इलेक्ट्रॉनिक्स डिपार्टमेंट की प्रोफ़ेसर श्रीमती सुजाता नागरगोजे ने कहा कि मिट्टी और पानी इंसान की ज़िंदगी के बुनियादी आधार हैं और सभी को इन्हें प्लान के साथ बचाना चाहिए।श्रीमती तरुलता धनके ने इस पहल की तारीफ़ करते हुए कहा कि पानी अधवा पानी जिरवा का मैसेज हर खेत, डैम और युवाओं के मन तक पहुंचेगा और एक खुशहाल और सूखा-मुक्त महाराष्ट्र बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा, स्थानीय युवा प्रतिभागी पवन चौहान और धीरेंद्र चौधरी ने रोजाना पैदल मार्च के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि पेड़ों की कटाई रोकना, पेड़ों को बचाना और पानी की बर्बादी से बचना समय की ज़रूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा




