कोलकाता, 10 अगस्त (हि.स.)। हालिशहर में पुलिस हिरासत में मारे गए तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बिरजू कोएट के परिवार को राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने के बाद आरजी कर अस्पताल में मृत महिला चिकित्सक के परिवार को तत्कालीन सरकार द्वारा घोषित 10 लाख रुपये के मुआवजे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने दोनों मामलों का संदर्भ देते हुए तत्कालीन सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। उस पर मृत चिकित्सक की मां तथा पानीहाटी से भाजपा विधायक रत्ना देवनाथ ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं की तुलना नहीं की जा सकती।
मृत चिकित्सक की मां ने कहा कि उनकी बेटी की मौत सरकारी अस्पताल में ड्यूटी के दौरान हुई थी। इसलिए उसकी मौत की जिम्मेदारी तत्कालीन सरकार से अलग नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि हलिशहर मामले में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी। घटना में आरोपित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। जबकि उनकी बेटी के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि आरजी कर घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 10 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा तो की, लेकिन घटना के वास्तविक दोषियों को सजा दिलाने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए। साक्ष्य मिटाने और कर्तव्य में लापरवाही के आरोपों से घिरे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी बेटी सरकारी अस्पताल में अपनी ड्यूटी निभाते हुए मारी गई थी। उसकी मौत की जिम्मेदारी तत्कालीन सरकार कभी नहीं टाल सकती। आरजी कर और हलिशहर की घटनाओं की तुलना नहीं होनी चाहिए।’’
इधर, कुणाल घोष ने हलिशहर में मुआवजा देने के मुख्यमंत्री के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि रुपये देकर किसी की मौत की भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन सरकारी नियमों के तहत मुआवजा देने की व्यवस्था है और इसके लिए निर्धारित कोष भी मौजूद है।
कुणाल ने सोमवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि मुख्यमंत्री ने सही किया और मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरजी कर मामले में तत्कालीन सरकार ने जब इसी तरह मुआवजा देने की बात कही थी, तब उसे लेकर विवाद खड़ा किया गया और इसे रिश्वत तथा मुंह बंद कराने की कोशिश बताया गया।
कुणाल ने दावा किया कि मुआवजा देना सरकार का दायित्व है और विभिन्न मामलों में मुआवजे की राशि तय करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि इसका रिश्वत से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि चिकित्सकों के एक संगठन ने मृत चिकित्सक के परिवार को सरकारी मुआवजा देने का समर्थन किया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता



