
- इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' में शामिल हुए केन्द्रीय कानून मंत्री
भोपाल, 08 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है।
केंद्रीय मंत्री मेघवाल शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस - 'इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस' के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कानून में नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का आधार रहा है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में सबसे पहले जस्टिस को स्थान दिया है। सोशल, इकोनोमिकल और पॉलिटिकल जस्टिस, ये तीनों शब्द भारतीय संवैधानिक दर्शन की आधारशिला है। आर्टिकल 39ए के माध्यम से संविधान ने सभी राज्यों को यह दायित्व सौंपा है कि प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका उपलब्ध कराई है। न्याय समान अवसर है, न्याय विश्वास है। न्याय से ही यह भावना विकसित होती है कि संविधान हमारे अधिकारों के साथ खड़ा है।
केन्द्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा कि ईज ऑफ जस्टिस सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, जिस प्रकार हमने ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग को राष्ट्रीय अभियान बनाया है, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था को भी पारदर्शी, सबसे लिए समान और आसान पहुंच वाली बनाना हमारा साझा प्रयास है। तकनीक के समावेश से न्याय प्रणाली में सरलता आई है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है। मोबाइल एप्लीकेशन की सहायता से लोगों को विधिक सेवाएं मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश हार्ट ऑफ इंडिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक विविधताओं का संगम देखने को मिलता है। यहां राजा भोज की सुशासन परंपरा और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायिक शासन व्यवस्था हमें प्रेरणा देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय ही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संवाद और सहभागिता की रही है। आज भारतीय न्याय व्यवस्था नागरिक केंद्रीय बनने की दिशा में अग्रसर है। मध्यस्थता प्रक्रिया आने वाले समय में भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे प्रभावी स्तंभ बनकर उभरेगी। परिवार, समाज और ग्राम पंचायतों में हमने बातचीत से समाधान की परंपरा को अपनाया है। समान न्याय व्यवस्था में जनजातीय समुदाय, घुमंतू समाज, नारी और बच्चे समान न्याय के अधिकारी हैं। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में इंदौर को अवॉर्ड मिलने पर इंदौरवासियों को बधाई भी दी।
सम्मेलन में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। स्पर्श के माध्यम से दिव्यांगजन किसी अन्य की सहायता लिए बगैर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि विधिक सेवाएं उनके लिए उपलब्ध हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जबलपुर के सहयोग से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स- विवाद से सहमति की ओर शुभारंभ भी नालसा के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। इससे परिवार, पड़ोसी और साझेदारी जैसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान निकलेगा। मध्यस्थता एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिसमें नागरिकों के पास सहमति से हल निकलाने की शक्ति होगी, न कि कोई समाधान उन पर थोपा जाए। न्याय सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। यह हम सभी के एक लक्ष्य के साथ चलने और एक दिशा में कार्य करने से भी संभव हो सकता है। न्याय को केवल विवादों का हल करने की प्रक्रिया नहीं बल्कि फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जाना चाहिए। मध्यस्थता प्रक्रिया हमारी न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का निपटारा करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है। आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग से ही हम न्याय मांगने वाले नागरिकों को संतुष्ट कर सकते हैं। न्याय की समानता समाज के हर वर्ग के साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय पाने के लिए सुगमतापूर्वक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। एक्सेस ऑफ जस्टिस एक संवैधानिक सोच नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाए, यह एक संवैधानिक अधिकार है। तकनीकी नवाचारों ने सभी वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच को सभी के लिए आसान और सुगम बनाया है।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश न्यायिक विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहा है कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी सरल, सहज और सम्मानजनक पहुंच हो। लोक अदालतें, कारागार सुधार और विधिक सेवाओं का जनजातीय क्षत्रों तक विस्तार की पहल सराहनीय है। हमारे प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक तंत्र अनेक मामलों का निपटारा न्यायालयों से पूर्व संवाद और सहमति से कर रहा है। हमारे यहां दिव्यांगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।
देश के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत के मुख्य आतिथ्य में आयोजित यह दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 09 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी संबोधित किया। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
कॉन्फ्रेंस में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति विजय विश्नोई, न्यायमूर्ति आलोक आराधे, न्यायमूर्ति शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर




